सुनकर आज तेरी कहानी..
एक जूनून सा मेरी रगों में दोड़ गया..
लगा जब कुछ नहीं बस में मेरे…
तेरी इस कहानी ने ये रुख मोड़ दिया..
हाँ शायद सही है तू...
अब कुछ भी बुरा हो नहीं सकता..
अब नहीं है कुछ भी साथ मगर..
अब कुछ भी मुझसे दूर हो नहीं सकता..
इससे बुरा अब कुछ और हो नहीं सकता..
कोई एक शख्स नहीं तय करेगा मेरी ज़िन्दगी की मंज़िल..
क्यों मुझे भी कोई सही हाथ मिल नहीं सकता..
अकेलेपन में जब में हूँ खुश तो..
हाथो में किसी का हाथ भी ख़ुशी देगा..
उसके छुने से हो जाएगी मेरी हर दुआ कुबूल..
अपने सपनों से वो मेरे सपने सजाएगा..
करू केसे तेरा.. तेरी कहानी का शुक्रिया..
सुनकर आज तेरी कहानी..
एक जूनून सा मेरी रगों में दोड़ गया..