मुझे नहीं तख़्त-ओ-ताज़ कि ख़वाहिश..
आशिक़ हूँ तुमसे वफ़ा चाहता हूँ...
बड़ी मुद्दतों तक रहा है इंतज़ार तेरा..
तेरा अलील हूँ तेरा दीदार चाहता हूँ..
डर सा है जुदाई का निगाहों में मेरी..
तुमसे कुछ अनकहे से वादे चाहता हूँ..
तेरी खता कि भी खुदा से सजा मिली मुझे..
तेरे गुनाहों का अब में हिसाब चाहता हूँ..
मुझे नहीं मिलते हसने के बहाने कभी..
मैं ग़मज़दा हूँ मुस्कुराने कि वजह चाहता हूँ...
एक तुम्हें पाने को मांगी है दुआएं कई..
अब उस हर दुआ का मैं सिला चाहता हूँ..
तुम्हें तो न थी न होगी चाहत मेरी..
मैं तेरी ज़रुरत बनने का हुनर चाहता हूँ..
यूँ गुज़र गए जैसे राहों में अजनबी कोई..
कुछ सवालों का अब तुमसे जवाब चाहता हूँ..
चले जाओ नहीं दूंगा कोई आवाज़ भी तुमको..
बस तेरे इस करम कि मैं वजह चाहता हूँ..
रहा होगा तुम्हें अरमान चाँद सितारों का मगर..
मैं तो बस तुम्हें.. सिर्फ़ तुम्हें चाहता हूँ..
