किसी के लिए जीने की वजह.. किसी के लिए कुछ भी नहीं
दो ज़िन्दगी जीये जाते है..
एक कुबूल हुई दुआ और एक गुमनाम शक्सियत ..
रंग दोनों ही खुद पर चढ़ाए जाते है..
उसके हुकुम की तामीर और जमाने की उमीदें..
दोनों के लिए हिम्मत जुटाए जाते है..
उसकी मैं कमली..और एक बेटी..
मुखोटे दोनों पहनाये जाते है..
दर्द में भी झूमें खुशियों में भी नाचे..
रक्स दोनों ही हर रोज़ किये जाते है..
बेसबब हँसना..और टूट के रोना..
वक़्त दोनों ही गुज़ारे जाते है..
वो मुझे रोता न देख पाये.. लोग मुझे हसने नहीं देते..
दोनों को ख़ुशी के बहाने दिए जाते है..
क्यों उसे है इतनी मोहब्बत..क्यों इन्हें इतनी नफरत है..
कुछ सवालों के बस जवाब ढूंढे जाते है..