कैसे करे ऐसे दर्द से शिकायत... जिसे तेरी ख़ुशी के लिए सहा है..
कैसे रूठ जाये उस शख्स से..जिसे इस दिल ने चुना है..
तुझसे मेरा रिश्ता.. मेरा इश्क ही कुछ ऐसा है..
जैसा किताबों में पढ़ा है.. कहानी में सुना है..
तुझे पाया तो मिली है सल्तनत ऐसी..जैसे किसी फकीर को आलीशान महल मिला है..
मेरी मज़बूरी है तुझे खुद से दूर रखना.. मिला है एक हीरा मगर उसे पहनने की मुझे इजाज़त नहीं है..
तू मेरा है.. मुझसे है.. मेरे लिए है मगर.. तुझे एक अजीज़ को तोहफे में दिया है..
अपने ही दिल के एक टुकड़े को किसी और को दिया है..
तु कहेगा एक दिन तू बहुत खुश है उसे पाकर.. उम्मीद है तुझे वो मुझसे भी प्यारा हो..
तू कहेगा बड़े मज़े में कट रही है ज़िन्दगी तेरी.. लगेगा मुझे मैं अब सुकून में हूँ..
तब भी इश्क तो तुझसे उतना ही होगा मुझे.. तुझसे मेरा दिल कुछ ऐसा जुड़ा है..
तू मेरा अपना मेरे अपनों से ज्यादा है..तू किसी और का होकर भी मुझसे बंधा है..
तुझसे मेरा रिश्ता.. मेरा इश्क ही कुछ ऐसा है..