आओ ज़रा साथ चलते है..
बेगाने रास्तों पर जीते है मरते है..
बहुत हो गई खुद से आंख मिचोली..
अब ज़रा अनकहे लफ्ज़ सुनते है..
ज़माना देख कर जलता है.. बाते बनाता है...
चलो ज़रा उसका सामना करते है...
इस दिल की.. इस जान की..
अपनी मजबूरियां है.. अपनी सरहदे..
चलो ज़रा दिल में उतरकर.. जिंदगी में बसते है..
मुझे नहीं चाहिए मजबूरियों का रिश्ता..
नहीं करनी है मुझे गुस्ताखियाँ कोई...
अपनी ही ख़ुशी से आओगे तुम..
अब हम ये आस रखते है..
आओ ज़रा साथ चलते है..