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Friday, 20 July 2012

सुनकर आज तेरी कहानी..

सुनकर आज तेरी कहानी..
 एक जूनून सा मेरी रगों में दोड़ गया.. 
लगा जब कुछ नहीं बस में मेरे…
 तेरी इस कहानी ने ये रुख मोड़ दिया..
 हाँ शायद सही है तू...
 अब कुछ भी बुरा हो नहीं सकता..
 अब नहीं है कुछ भी साथ मगर..
अब कुछ भी मुझसे दूर हो नहीं सकता..
इससे बुरा अब कुछ और हो नहीं सकता..
 कोई एक शख्स नहीं तय करेगा मेरी ज़िन्दगी की मंज़िल..
क्यों मुझे  भी कोई सही हाथ मिल नहीं सकता..
अकेलेपन में जब में हूँ खुश तो..
हाथो में किसी का हाथ भी ख़ुशी देगा..
उसके छुने से हो जाएगी मेरी हर दुआ कुबूल..
अपने सपनों से वो मेरे सपने सजाएगा..
करू केसे  तेरा.. तेरी कहानी का शुक्रिया..
सुनकर आज तेरी कहानी..
 एक जूनून सा मेरी रगों में दोड़ गया..  

8 comments:

  1. Totally Loved this one, As Mesmerizing it is.. I cant find Much words to say the beautiful feelings that are expressed!

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  2. Thnkyou so much.. & thanks to you too.. I love that story.. & result is here :) :)

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    1. All I can say Is Im Glad I could be of Help :) :) This is something more wonderful than the Story itself I think..

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    2. Awwww Thanks buddy.. Thankyou so much.. so nice of you really :) <3

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    3. As I said, Let the Pleasure be all Mine :)

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  3. Thumbs up and best of luck :)))

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