उससे बातें देर तक करना अच्छा लगता है.
दूर रह कर भी पास में रहना अच्छा लगता है..
आरज़ू नहीं मेरी.. नहीं है मेरा इंतजार वो..
फिर भी उसकी बातों में खोना अच्छा लगता है..
ज़रा सा जानती हूँ उसे. थोड़ा सा पहचानती हूँ..
लगता है कोई नाता उससे.. लगता है जैसे साथ है वो..
खुद को खोकर.. खुद को पाना अच्छा लगता है..
कुछ भी नहीं नाता उससे..ना ही कोई खास है वो..
बस गुफ्तगू के सिलसिले उससे.. मेरा कोई राज़दार है वो..
बात बड़ी अजीब है लेकिन अच्छा लगता है..
हर पल उसकी यादों में खोना अच्छा लगता है..
बात बड़ी अजीब है लेकिन अच्छा लगता है..
हर पल उसकी यादों में खोना अच्छा लगता है..
उससे बातें देर तक करना अच्छा लगता है..
awesome romantic feeling....lekin pehle ye batao..ki wo hai kaun...? ;):P
ReplyDeleteThanks Aaammmmmoo..:)) Wo hai ek khayaal :)
Deleteoooh Nice, Romantic & Mushy it is.. Really Lovely to read.. Do write more of such na..
ReplyDeleteThanks.. I m glad you like it.. :D Yes, I Will try to do that :)
DeleteWaah Poonam ji... Aise blog padhna अच्छा लगता है. .. :D
ReplyDeleteShukriya apka Ashish Ji :))
Deleteबहुत ही प्यारी पंक्तियाँ है..
ReplyDeleteआपकी बातें यूँ ही चलती रहे :)))
शुक्रिया गुरनाम जी :)
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