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Friday, 16 November 2012

चंद अल्फाज़ अपने लिए..



कुछ ख़याल लिखे है अपने लिए.. चंद अल्फाज़ अपने लिए 
जो नहीं कहा कभी किसी को भी.. ऐसी एक बात अपने लिए 
लिया लफ्जों का सहारा की हो जाये मुलाक़ात खुदसे.. 
दिया ज़रा सुकून खुद को आज..  अपनी ज़रा सी ख़ुशी  के लिए 
चाँद की सितारों की बहारों की बाते हर अंदाज़ में कर ली तुम्हारी  बाते..
भुला दिया था इन सब में खुद को कहीं..  आज किया खुदको याद अपने लिए..
मेरा वजूद कहीं गुम गया था तेरे इंतजार में.. गई थी  खुदसे रूठ तेरे प्यार में..
आज ज़रा मनाया खुदको... देकर दिलासा बहलाया खुदको..
कुछ बातें की खुदको हँसाने के लिए..  बिताये कुछ लम्हें अपने साथ अपने लिए..
कुछ ख़याल लिखे है अपने लिए चंद अल्फाज़ अपने लिए..

6 comments:

  1. As Lovely as always, No doubts bout the quality of ya work..

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  2. waaaaaaaaahhhhh.... bahut bahut khoob..
    bahut kam hota hai ki hum apne liye kuch likhte hain..
    loved the thought. :))))

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    1. Ji sahi kaha.. apne liye kuch likha hai :) Shukriya apka Gurnam ji :)

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