बगीचे में लगी शाख से गिरा पहला फूल ..
मैंने अब तक उसे संभाले रखा है..
अब ज़रा अंदाज़ लगाओ..मैंने किस क़दर तेरी यादों को संभाले रखा है..
वो तेरी पहली नज़र..वो तेरा इज़हार-ए - मोहब्बत..
वो पहली झलक तेरी..वो मेरी पहली मोहब्बत..
संभाला है तेरे इश्क़ में मिला बहार का मौसम मैंने..
वो तेरी बाहों में कटी सर्दियां संभाली है..
वो तेरे लहजे के बिगड़ने से लगी गर्मी मुझको...
वो तेरे जाने से जो खिज़ा आई है..
संभाली है तेरी यादों में मिली सिस्कियां मैने..
वो तेरे आने से मिली मुस्कराहट संजोई है..
तेरे इश्क़ के सारे मौसम संभाले है..
तुझसे ही मैंने ये दिन रात संभाले है..
अब ये फूल जो मेरे हाथों मैं है ये मुरझाता जायेगा..
अब ये जो दिल मेरे सीने में है बिखरता जायेगा..
ये शाख तो फिर से बहार देखेगी..
नए गुलों को फिर से.. ये खुद पर सजाएगी..
पर अब मेरी क़िस्मत में न होगी बहार-ए - मोहब्बत…
अब न मेरी ज़िन्दगी से ये खिज़ा जायेगी..
अब न आयेगी निगाहों में रौशनी मेरे..
अब न फिर ये ज़िन्दगी मुस्कुराएगी..
मैंने अब तक उसे संभाले रखा है..
अब ज़रा अंदाज़ लगाओ..मैंने किस क़दर तेरी यादों को संभाले रखा है..
वो तेरी पहली नज़र..वो तेरा इज़हार-ए - मोहब्बत..
वो पहली झलक तेरी..वो मेरी पहली मोहब्बत..
संभाला है तेरे इश्क़ में मिला बहार का मौसम मैंने..
वो तेरी बाहों में कटी सर्दियां संभाली है..
वो तेरे लहजे के बिगड़ने से लगी गर्मी मुझको...
वो तेरे जाने से जो खिज़ा आई है..
संभाली है तेरी यादों में मिली सिस्कियां मैने..
वो तेरे आने से मिली मुस्कराहट संजोई है..
तेरे इश्क़ के सारे मौसम संभाले है..
तुझसे ही मैंने ये दिन रात संभाले है..
अब ये फूल जो मेरे हाथों मैं है ये मुरझाता जायेगा..
अब ये जो दिल मेरे सीने में है बिखरता जायेगा..
ये शाख तो फिर से बहार देखेगी..
नए गुलों को फिर से.. ये खुद पर सजाएगी..
पर अब मेरी क़िस्मत में न होगी बहार-ए - मोहब्बत…
अब न मेरी ज़िन्दगी से ये खिज़ा जायेगी..
अब न आयेगी निगाहों में रौशनी मेरे..
अब न फिर ये ज़िन्दगी मुस्कुराएगी..
Beautifully written. You have come a long way. Keep it up!
ReplyDeleteThanks Nazo.. Thanks for your appreciation :) :*
DeleteThis was beautiful, Keep Improving with every post ya write.
ReplyDeleteThanks Swapnil.. :) Your words means a lot to me.. Always.. Thanks :)
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